ट्रेनों में किन्नर समुदाय के नाम पर ‘वसूली’ का बढ़ता जाल: प्रशासनिक खामोशी और सहमे यात्री

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रिर्पोट मोहम्मद कलीम अंसारी

सहारनपुर _भारतीय रेलवे, जिसे देश की ‘जीवन रेखा’ कहा जाता है, आजकल कई रूटों पर आम यात्रियों के लिए मानसिक तनाव की जगह बनती जा रही है। ट्रेनों के स्लीपर और जनरल से लेकर कई बार वातानुकूलित (AC) कोचों तक, भीख मांगने के नाम पर होने वाली जबरन वसूली और अभद्रता की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मीडिया रिपोर्टों और यात्रियों के अनुभवों के अनुसार, इस समस्या का एक बड़ा पहलू किन्नर के रूप में सक्रिय कुछ असामाजिक तत्वों की मनमानी और रेलवे प्रशासन की ढिलाई है।

सफर के दौरान यात्रियों का* *मानसिक और आर्थिक शोषण

 

ट्रेन में सफर कर रहे सामान्य यात्री, परिवार और महिलाएं अक्सर खुद को असहाय महसूस करते हैं।

 

जबरन पैसे ऐंठना: कई मामलों में भीख मांगने का तरीका सिर्फ आग्रह तक सीमित नहीं रहता। 10, 20 या 50 रुपये मांगने के बजाय 100 से 500 रुपये तक की मांग की जाती है।

 

बेशर्मी और अभद्रता: यदि कोई यात्री पैसे देने से इंकार करता है या कम पैसे देता है, तो उनके साथ सरेआम गाली-गलौज की जाती है। महिलाओं और बच्चों के सामने अश्लील इशारे या हरकतें कर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित और शर्मिंदा किया जाता है, ताकि दबाव में आकर वे पैसे दे दें।

 

रूप बदलकर ‘नकली किन्नरों’ का गिरोह: विभिन्न जांच रिपोर्टों और पुलिस कार्रवाइयों में यह बात सामने आई है कि इस पूरे नेटवर्क में कई ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी शामिल हैं जो सिर्फ रूप बदलकर किन्नर होने का ढोंग करते हैं और यात्रियों को लूटने का काम करते हैं।

 

बिना टिकट सफर और सुरक्षा तंत्र पर सवाल

 

रेलवे नियमों के तहत बिना वैध टिकट के ट्रेन या स्टेशन परिसर में प्रवेश करना अपराध है। इसके बावजूद यह पूरा घटनाक्रम खुलेआम चल रहा है

 

टीटीई (TTE) और आरपीएफ (RPF) (GRP)की अनदेखी: यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन और चलती ट्रेनों में ना तो चेकिंग स्टाफ (TTE) इन्हें रोकता है और ना ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कोई ठोस कार्रवाई करता है। कई बार विवाद की स्थिति बनने पर भी सुरक्षाकर्मी मूकदर्शक बने रहते हैं।

 

अवैध प्रवेश: बिना टिकट के डिब्बों में दाखिल होना और एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक बेरोकटोक यात्रा करना रेलवे के सुरक्षा दावों की पोल खोलता है।

 

प्रशासनिक कार्रवाई और समाधान की जरूरत

 

रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा और सम्मानजनक सफर सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की तत्काल आवश्यकता है:

 

कड़ी चेकिंग और गश्त: चलती ट्रेनों, विशेषकर संवेदनशील रूटों पर RPF और GRP की नियमित गश्त बढ़ाई जाए और बिना टिकट व अनाधिकृत प्रवेश करने वालों पर तुरंत कानूनी कार्रवाई हो।

पहचान और सत्यापन: नकली रूप बनाकर यात्रियों को प्रताड़ित करने वाले गिरोहों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।

 

हेल्पलाइन और त्वरित प्रतिक्रिया: 139 हेल्पलाइन और RailMadad ऐप के जरिए मिलने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।

ट्रेन में सुरक्षित और भयमुक्त माहौल पाना हर यात्री का कानूनी और बुनियादी अधिकार है। जब तक रेलवे प्रशासन और पुलिस इस मनमानी के खिलाफ सख्त और निरंतर अभियान नहीं चलाएंगे, तब तक आम यात्री का सफर यूं ही असुरक्षित और अपमानजनक बना रहेगा।

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